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कर्नल सोफिया 5वीं तक एमपी के छतरपुर में पढ़ी हैं:चाचा बोले- बचपन से था हथियारों का शौक, कहती थीं आर्मी ही जाॅइन करूंगी
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कर्नल सोफिया 5वीं तक एमपी के छतरपुर में पढ़ी हैं:चाचा बोले- बचपन से था हथियारों का शौक, कहती थीं आर्मी ही जाॅइन करूंगी

HN

By Editor

मई 08, 2025

कर्नल सोफिया 5वीं तक एमपी के छतरपुर में पढ़ी हैं:चाचा बोले- बचपन से था हथियारों का शौक, कहती थीं आर्मी ही जाॅइन करूंगी

Published on May 8, 2025 | Source: Dainik Bhaskar

कर्नल सोफिया 5वीं तक एमपी के छतरपुर में पढ़ी हैं:चाचा बोले- बचपन से था हथियारों का शौक, कहती थीं आर्मी ही जाॅइन करूंगी
पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हुए ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी का पैतृक गांव मध्यप्रदेश में है। सोफिया ने छतरपुर जिले के नौगांव में पांचवीं तक की पढ़ाई की। एयर स्ट्राइक की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सोफिया ने नौगांव के चच्चा कॉलोनी में रहने वाले उनके परिवार को कॉल कर कहा- मिशन पूरा हुआ, कैसा लगा, धमाका कर दिया न। कर्नल सोफिया कुरैशी का जन्म रंगरेज मोहल्ले में 12 दिसंबर 1975 को हुआ। उनकी प्राथमिक शिक्षा नौगांव के शासकीय जीटीसी प्राथमिक स्कूल से हुई। नौगांव में उनके चाचा का परिवार रहता है। दैनिक भास्कर ने नौगांव में सोफिया के परिवार से बात की। आर्मी रिटायर्ड उनके चाचा वली मुहम्मद कहते हैं, सोफिया को बचपन से हथियारों का शौक था। कहती थीं, आर्मी जॉइन करूंगी। बहन ने परिवार का सम्मान बढ़ाया सोफिया के चचेरे भाई मैकेनिकल इंजीनियर मोहम्मद रिजवान ने बताया, सोफिया कर्नल बन चुकी है। उसने वह 5वीं क्लास तक नौगांव में ही रही। पूरी दुनिया को आपरेशन सिंदूर की जानकारी बहन सोफिया ने दी, इससे परिवार का सम्मान और बढ़ गया है। भारत ने बहुत सुन लिया, अब हमारी सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है। बचपन में ही सोच लिया आर्मी जॉइन करना है सोफिया के पिता ताज मोहम्मद कुरैशी ने कहा, जब सोफिया ने पढ़ाई पूरी कर ली थी, तब उसने कहा था कि उसे आर्मी जॉइन करना है। मेरे छोटे भाई ने इसके लिए मना कर दिया था, लेकिन मैंने बेटी को देशसेवा के लिए जाने दिया। उसने सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। अगर सरकार मौका देती है तो मैं आज भी पाकिस्तान में जाकर आतंकवादियों को खत्म करने का काम करूंगा। मां हलीमा कुरैशी ने कहा, बेटी ने बहनों और माताओं के सिंदूर का बदला ले लिया है। सोफिया पिता और दादा के पदचिह्नों पर चलना चाहती थीं। बचपन में ही कहती थी कि सेना में जाना है। पढ़ाई में अव्वल थी सोफिया, खेल में रुचि नहीं सोफिया के चाचा वली मुहम्मद कुरैशी ने बताया, सोफिया पढ़ाई में काफी अच्छी थी। वह खेलने में कम रुचि रखती थी। एक बार हम लोग सोफिया के पिता से मिलने वडोदरा गए थे, तब उसने कहा था कि मैं सेना में जाऊंगी। इसके बाद सोफिया ने आर्मी जॉइन की थी। हमारे पिता आर्मी में थे, हम तीनों भाई भी आर्मी में थे। हम लोग रिटायर हो गए तो क्या हुआ, आज भी अगर देश को जरूरत पड़ेगी तो अपनी कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। वली मुहम्मद ने कहा, पाकिस्तान के लोग हमें कहते हैं कि तुम लोग मुसलमान नहीं हो। हम जिस देश की रोटी खा रहे हैं उस देश के गुण गाना चाहिए। जो लोग पाकिस्तान का पक्ष करते हैं उन लोगों से हमें नफरत है। पहले हमें अपने घर और वतन को देखना चाहिए, इस तरह दोगला काम नहीं करना चाहिए। ये भी पढ़ें... इंडियन आर्मी की लाइफलाइन क्यों है एमपी: युद्ध की रणनीति और गोला-बारूद की सप्लाई यहीं से, एयरफोर्स स्टेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी की ट्रेनिंग भी एमपी न तो पाकिस्तान के साथ थल सीमा साझा करता है और न ही समुद्री सीमा। तब जल, थल और वायु तीनों मोर्चे पर सुरक्षित एमपी को हाईअलर्ट पर रखने की क्या वजह है? इसे लेकर भास्कर ने रिटायर्ड कर्नल डॉ. शैलेंद्र सिंह राणा से बात की। उन्होंने कहा कि एमपी देश का ह्रदय प्रदेश है। देश की सीमाओं से काफी दूर और सुरक्षित जगह है, इसलिए यहां सेना की कई अहम यूनिट्स हैं।

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