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नीरजा चौधरी का कॉलम:सीजफायर के बजाय ट्रम्प की हरकतों से नाराजगी है - Politics

नीरजा चौधरी का कॉलम:सीजफायर के बजाय ट्रम्प की हरकतों से नाराजगी है - Politics
मुख्य विवरण
पहलगाम में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की प्रतिक्रिया के लिए ऑपरेशन सिंदूर से बेहतर नाम कोई दूसरा नहीं हो सकता था।
लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार को देश की महिलाओं का और समर्थन मिला है।
सीजफायर के निर्णय पर कई लोगों ने सवाल जरूर उठाए कि भारत इसके लिए क्यों राजी हुआ और ट्रम्प यह दावा कैसे कर सकते हैं कि इसके लिए अमेरिका ने मध्यस्थता की थी।
अतीत में हुए आतंकी हमलों से पहलगाम इन मायनों में भिन्न था, क्योंकि उसमें केवल हिंदू पुरुषों काे निशाना बनाया गया था।
उनकी पत्नियों की आंखों के सामने उनके सिंदूर को मिटा दिया गया था।
इसने विशेष रूप से महिलाओं को आक्रोशित किया था।
लेकिन ऑपरेशन सिंदूर की सैन्य-प्रतिक्रिया के बाद जब कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को इसकी जानकारी देने के लिए उतारा गया तो इसने कई महिलाओं को प्रभावित किया।
एक मुस्लिम थीं और दूसरी हिंदू।
एक हिंदी में बोल रही थीं और दूसरी अंग्रेजी में।
यह एक आधुनिक, एकजुट, समावेशी भारत का प्रतीक था।
चेन्नई की एक महिला ने मुझे बताया, जब मैंने वह दृश्य देखा तो मैं रो पड़ी।
यह आश्चर्य की बात नहीं थी कि सोमवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भी सशस्त्र बलों की वीरता को देश की माताओं, पत्नियों और बहनों को समर्पित किया।
भाजपा को ऑपरेशन सिंदूर के बाद केवल महिलाओं का ही समर्थन नहीं मिला है।
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती जैसी विरोधी ने भी विपक्ष से पक्षपातपूर्ण राजनीति न करने और शांति कायम करने की कोशिश कर रहे प्रधानमंत्री की आलोचना न करने का आग्रह किया।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सहयोग का प्रयास किया, हालांकि केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनके पास पुलिस, भूमि आदि के अधिकार नहीं हैं।
कश्मीरी लोग भी इस मुकाम पर भारत के बाकी हिस्सों के साथ एकजुट होकर खड़े हैं और घाटी में अमन कायम रखना चाहते हैं।
शशि थरूर जैसे कांग्रेस नेताओं ने भी इस अवसर पर भारत की पोजिशन पर बेहतर तरीके से दलीलें पेश कीं।
लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के बजाय सीजफायर के लिए तुरंत राजी हो जाने के लिए सरकार की चाहे जितनी आलोचना की जाए, यह उसकी अपनी पोजिशन के अनुरूप ही था।
क्योंकि शुरू में ही भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि उसका इरादा पाकिस्तान में सैन्य प्रतिष्ठानों या नागरिक ठिकानों पर हमला करने का नहीं, केवल आतंकी संगठनों को नष्ट करने का था।
भारत युद्ध नहीं चाहता था।
विशेष जानकारी
जब पाकिस्तान ने 36 शहरों पर ड्रोन आदि से हमला किया, तब जाकर भारत ने पाकिस्तान के 11 हवाई ठिकानों को नुकसान पहुंचाया।
अगर आप आम लोगों से बात करें, तो उनमें से कई आपको बताएंगे कि वे लंबे समय तक चलने वाला युद्ध नहीं चाहते थे।
वे बस इतना चाहते थे कि पाकिस्तान को एक स्पष्ट संदेश देकर सबक सिखाया जाए।
जो लोग लंबे युद्ध के लिए अड़े हुए थे, उन्हें आधुनिक युद्धों की विभीषिकाओं, उसमें उपयोग की जाने वाली घातक नई तकनीकों (इस मामले में पाकिस्तान के परमाणु हथियार) को भी ध्यान में रखना चाहिए, भले ही प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को परमाणु ब्लैकमेलिंग न करने को कहा हो।
यह भी याद रखा जाना चाहिए कि चीन ने अपनी सिक्स्थ जनरेशन मिसाइलें और जेट लड़ाकू विमान पाकिस्तान को दिए हैं।
इसके मद्देनजर आने वाले समय में अब भारत को पाकिस्तान की सैन्य-क्षमता पर स्पष्ट बढ़त हासिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।
वास्तव में सीजफायर की टाइमिंग से ज्यादा नुकसान इसका श्रेय लेने की ट्रम्प की कोशिशों से हुआ है।
भारत और पाकिस्तान मिलकर इसकी घोषणा करते, इससे पहले ही अमेरिका ने कह दिया कि उसने इसकी मध्यस्थता की है।
ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष-विराम के लिए सहमत नहीं होने पर अमेरिका दोनों देशों के साथ व्यापार नहीं करता।
इसके बाद सोमवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में मोदी ने नुकसान की भरपाई की कोशिश की।
हालांकि उन्होंने ट्रम्प का जिक्र नहीं किया, लेकिन सच्चाई बयान की।
मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत ने केवल अपनी सैन्य-कार्रवाइयों को रोका है, लेकिन लड़ाई अभी जारी है।
अब सरकार अपने रक्षा विभाग और विदेशों में स्थित अपने मिशनों से भी कह रही है कि वे सच्चाई को सामने लाएं।
भाजपा ने पूरे देश में 11 दिवसीय तिरंगा यात्रा भी शुरू की है, ताकि नैरेटिव को फिर से ऑपरेशन सिंदूर और उसकी उपलब्धियों पर लौटाया जा सके।
इस सबके राजनीतिक मायने क्या होंगे, यह देखा जाना अभी बाकी है।
सीजफायर की टाइमिंग से ज्यादा नुकसान इसका श्रेय लेने की ट्रम्प की कोशिशों से हुआ है।
अब तिरंगा यात्रा आदि से नैरेटिव को फिर से ऑपरेशन सिंदूर और उसकी उपलब्धियों पर लौटाने की कोशिशें की जा रही हैं।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं।
)।
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Posted on 16 May 2025 | Source: Dainik Bhaskar | Follow HeadlinesNow.com for the latest updates.
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