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रामचरितमानस भाग 25: आध्यात्मिक ज्ञान का प्रकाश | धर्म और आध्यात्म Sati's Wrath Ramcharitmanas Epic Poetry
हेडलाइंसनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, रामचरितमानस के 25वें भाग में सती के क्रोध और दक्ष यज्ञ के विनाश का मार्मिक वर्णन मिलता है।
श्रीरामचरितमानस के इस खंड में पति के अपमान से उत्पन्न सती के अत्यंत दुःख और क्रोध का चित्रण किया गया है।
उन्होंने शिवजी के अपमान को असहनीय पाया और क्रोधित होकर सारे सभासदों और मुनियों को फटकार लगाई।
ग्रंथ में सती के योगाग्नि में जलने और दक्ष यज्ञ के विनाश की घटना का वर्णन अत्यंत मार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
यह घटना धर्म, कर्तव्य और त्याग के महत्व को उजागर करती है, साथ ही पति-पत्नी के संबंधों और समाज के विभिन्न पक्षों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
पाठक इस भाग में आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षाओं का गहन अनुभव कर सकते हैं।
यह अध्याय धार्मिक विचारों और देवता शिव के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है, पूजा और आध्यात्मिकता के प्रति सम्मान को बल देता है।
इस घटना से जुड़े कई तीर्थ स्थानों और मंदिरों में आज भी भक्तजन पूजा-अर्चना करते हैं।
रामचरितमानस के इस भाग का अध्ययन हमें धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन के प्रति गहन सोचने को प्रेरित करता है।
- सती का क्रोध और योगाग्नि में प्रवेश
- दक्ष यज्ञ का विनाश और उसका महत्व
- धर्म, कर्तव्य और आध्यात्मिकता पर प्रकाश
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Posted on 15 July 2025 | Check HeadlinesNow.com for more coverage.
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