HEADLINES NOW

धर्म, राजनीति और चुनाव: क्या हमारी दीवारें टूट पाएंगी? राजनीति Bihar Elections Fuel Communal Tension

Leader spotlight:

धर्म, राजनीति और चुनाव: क्या हमारी दीवारें टूट पाएंगी? राजनीति Bihar Elections Fuel Communal Tension news image

धर्म, राजनीति और चुनाव: क्या हमारी दीवारें टूट पाएंगी? राजनीति Bihar Elections Fuel Communal Tension

हेडलाइंसनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनावों के मद्देनजर मुहर्रम में सांप्रदायिक हिंसा की आशंका ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के जटिल संबंधों को उजागर किया है।

वास्तव में, आजकल हर त्योहार पर कलह का डर बना रहता है, जो देश की सामाजिक एकता के लिए एक गंभीर चुनौती है।

इतिहासकार विल ड्यूरेंट के अनुसार, 12वीं सदी में तुर्कों के आक्रमण ने भारत में व्यापक हिंसा और विनाश फैलाया था, जिससे हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचा और धर्मांतरण हुआ।

हालांकि, सदियों से भारत में गंगा-जमुनी तहजीब का भी अस्तित्व रहा है, जहाँ हिंदू और मुसलमानों ने आम तौर पर सह-अस्तित्व कायम रखा है।

ओडिशा के रेमांडा गांव का एक मुस्लिम परिवार जो हिंदुओं के रथयात्रा उत्सव में हिस्सा लेता है, और अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का जोगमाया मंदिर का दौरा, इस बात के प्रमाण हैं कि धार्मिक सद्भाव संभव है।

लेकिन राजनीतिक नेताओं द्वारा धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल चुनावों में वोट बटोरने के लिए किया जाता रहा है, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है।

बीजेपी और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियाँ भी इससे अछूती नहीं रहीं हैं।

इस प्रकार, चुनावों के दौरान धार्मिक सौहार्द बनाए रखना और साम्प्रदायिक दीवारों को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है, जिसे केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनजागरण से ही पार किया जा सकता है।

यह चुनौती केवल नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए है।

  • चुनावों में धार्मिक सौहार्द बनाए रखना चुनौती
  • राजनीतिक नेता और साम्प्रदायिकता का खेल
  • गंगा-जमुनी तहजीब की रक्षा जरूरी

Related: Education Updates


Posted on 22 July 2025 | Check HeadlinesNow.com for more coverage.

Topics:
राजनीति Bihar Elections Communal Tension

Comments

टिप्पणियाँ