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मुंबई: फुटपाथ अतिक्रमण पर बॉम्बे हाईकोर्ट का कड़ा फैसला, BMC अधिकारियों पर जांच Bmc Officials Facing Footpath Encroachment Probe
हेडलाइंसनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई में फुटपाथ अतिक्रमण के एक मामले में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) अधिकारियों की भूमिका की जांच का आदेश दिया है।
यह मामला एक हाउसिंग सोसाइटी के बाहर अवैध रूप से स्थापित पान, बीड़ी और गुटखा की दुकान से जुड़ा है।
न्यायालय ने न केवल इस अवैध ढांचे को तत्काल हटाने का आदेश दिया है, बल्कि छह साल से अधिक समय तक अतिक्रमण को बरकरार रखने में शामिल BMC अधिकारियों के खिलाफ भी जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरिफ एस डॉक्टर की खंडपीठ ने निर्वाण हाउसिंग सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि नवंबर 2019 में बीएमसी द्वारा अवैध स्टॉल को ध्वस्त करने के बावजूद, यह फिर से खड़ा हो गया और बिना किसी वैध लाइसेंस या अनुमति के संचालित होता रहा।
17 जुलाई, 2023 की एक निरीक्षण रिपोर्ट ने स्टॉल के अस्तित्व की पुष्टि की, जिसके बाद अदालत ने कठोर कार्रवाई का निर्णय लिया।
यह मामला भारत के शहरी नियोजन और सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाता है, देश के नागरिकों के अधिकारों और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं प्रकट करता है।
इस फैसले से राष्ट्रीय स्तर पर शहरी प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल मिलता है।
यह देश के अन्य शहरों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहाँ इस तरह के अतिक्रमण आम हैं।
अदालत का यह कड़ा रुख सरकार को शहरी विकास में प्रभावी नीतियाँ बनाने और उनका कठोरता से पालन करने के लिए प्रेरित करेगा।
- बॉम्बे हाईकोर्ट का कड़ा रुख: फुटपाथ अतिक्रमण पर कार्रवाई।
- BMC अधिकारियों की भूमिका की होगी जांच: 6 साल से अधिक समय तक अतिक्रमण बरकरार।
- अवैध पान, बीड़ी, गुटखा की दुकान को तत्काल हटाने का आदेश।
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Posted on 26 July 2025 | Stay updated with HeadlinesNow.com for more news.
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