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साढ़ेसाती और ढैय्या का असर? सावन में करें ये उपाय, मिलेगा राहत Breaking News Update

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साढ़ेसाती और ढैय्या का असर? सावन में करें ये उपाय, मिलेगा राहत Breaking News Update

भगवान शिव का प्रिय मास सावन इस वर्ष 11 जुलाई से आरंभ हुआ है और इसका समापन 9 अगस्त को होगा।

इस दौरान वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और हरियाली की छटा चारों ओर छाई रहती है।

यही समय उन लोगों के लिए बेहद शुभ माना गया है जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव से पीड़ित हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव की विशेष आराधना से शनि दोष कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इन राशियों पर है शनि का प्रभाववर्तमान समय में सिंह और धनु राशि वाले शनि की ढैय्या से प्रभावित हैं।

वहीं कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है।

शनि दोष से पीड़ित जातकों को इस सावन मास में विशेष उपाय करने चाहिए, जिससे ग्रहों की अशुभता शांत हो सके।

भगवान शिव को शनि का गुरु माना जाता है, इसलिए उनकी आराधना करने से शनि देव की दृष्टि शांत होती है और जीवन में शांति, स्थिरता और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

शिव पूजा से कैसे मिलेगी शनि दोष से मुक्ति?सावन सोमवार को खासतौर पर शिवलिंग का गंगाजल, काले तिल, दूध और शहद से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय का जाप इस प्रभाव को और भी शक्तिशाली बनाता है।

साथ ही काले तिल और कच्चे दूध से अभिषेक कर भगवान शिव से सभी दोषों से मुक्ति की प्रार्थना करनी चाहिए।

राशि अनुसार विशेष उपायसिंह राशिशनि की ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए सावन सोमवार का व्रत करें।

शिवलिंग पर गंगाजल, सरसों का तेल, काले तिल, उड़द दाल और शमी के पत्ते अर्पित करें।

51 बेलपत्रों पर सफेद चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखकर एक-एक करके अर्पित करें।

सुबह और शाम महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करें।

धनु राशिढैय्या के प्रभाव को दूर करने के लिए शमी के पत्तों को पीसकर गंगाजल में मिलाएं और अभिषेक करें।

काले तिल, दूध, बेलपत्र, चंदन, भांग, धतूरा, अक्षत और दही से शिवलिंग का पूजन करें।

शिव चालीसा का पाठ रोज़ करें।

मेष राशिशनि की साढ़ेसाती से राहत पाने के लिए सावन सोमवार, शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का पालन करें।

भगवान शिव का शहद और जल से अभिषेक करें, फिर शुद्ध जल से दोबारा स्नान कराएं।

बेलपत्र पर चंदन से "राम" लिखकर अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें।

कुंभ राशिपंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें जिसमें दूध, शक्कर, घी, शहद और दही हो।

अभिषेक के बाद भगवान शिव और शनि देव के मंत्रों का जाप करें, साथ ही शनि चालीसा का पाठ करें।

हर दिन माथे पर सरसों का तिलक लगाएं।

मीन राशिसावन मास में रोज़ जलाभिषेक करना अति लाभकारी रहेगा।

शहद, चावल, सुगंधित जल और दूर्वा से शिवलिंग का पूजन करें।

अर्पण के समय ॐ नमो भगवते रुद्राय का जप करें और पूजा के बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

सभी दोषों से मिलती है मुक्तिसावन मास में भगवान शिव की भक्ति न केवल शनि, बल्कि राहु, केतु, बुध और अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव को भी दूर करती है।

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में विष योग या शनि-बुध दोष है, तो उसे सावन में काले तिल, कच्चा दूध, काले उड़द और चावल भगवान शिव को अर्पित करना चाहिए।

पूजन के बाद मन में प्रार्थना करें कि सभी बाधाएं दूर हों, जीवन में शांति बनी रहे और शिव कृपा हमेशा साथ रहे।

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Posted on 22 July 2025 | Keep reading HeadlinesNow.com for news updates.

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