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हरियाली अमावस्या: शिव पूजा और पितृ तर्पण का महत्व | धर्म आध्यात्मिक Hariyali Amavasya: Auspicious Servarth Siddhi Yoga
हेडलाइंसनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, आज 24 जुलाई को पड़ रही हरियाली अमावस्या धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सावन मास की यह अमावस्या सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रही है, जिससे किए गए शुभ कार्यों के शीघ्र सिद्ध होने की मान्यता है।
सावन महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस महीने की अमावस्या शिव पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है।
इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का अभिषेक करना, किसी मंदिर में छायादार पेड़ का पौधा लगाना और पितरों के लिए धूप-दीप व तर्पण करना शुभ माना जाता है।
हरियाली अमावस्या का नाम ही इस तथ्य को दर्शाता है कि वर्षा ऋतु के चरम पर धरती हरियाली से भरपूर होती है।
यह प्रकृति के सौंदर्य का उत्सव है, जो किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे इस समय अपनी फसलें बो चुके होते हैं और पेड़-पौधे नए जीवन का आगाज़ कर रहे होते हैं।
तुलसी, पीपल, बरगद, नीम जैसे पवित्र और औषधीय पेड़ों का महत्व इस दिन और भी बढ़ जाता है।
यह दिन पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है, जिससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अमावस्या तिथि के साथ ही आधा महीना समाप्त होकर शुक्ल पक्ष का आरंभ होता है, जो नए आरंभों का प्रतीक है।
इस अवसर पर धर्म, आध्यात्मिकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह एक अनूठा अवसर है, जो हमें जीवन के मूल्यों की याद दिलाता है।
इस दिन पूजा, तर्पण और वृक्षारोपण से धर्म और पर्यावरण दोनों का संरक्षण होता है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी मिलकर धर्म और प्रकृति का सम्मान करें।
- हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।
- पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करना शुभ माना जाता है।
- मंदिर में छायादार पेड़ का पौधा लगाने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
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Posted on 25 July 2025 | Keep reading HeadlinesNow.com for news updates.
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