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शनि का वक्री गोचर: धार्मिक दृष्टि से क्या है महत्व? जानें राशिफल Saturn Retrograde Affects All Signs
हेडलाइंसनाउ की रिपोर्ट के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष महत्व है और इसका गोचर सभी 12 राशियों पर प्रभाव डालता है।
आज, 13 जुलाई की शाम लगभग 7 बजे, शनि मीन राशि में वक्री हो जाएगा।
यह वक्री अवस्था 138 दिनों तक रहेगी, और 28 नवंबर की रात को पुनः मीन राशि में मार्गी होगा।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, शनि के वक्री होने से मौसम में परिवर्तन, वर्षा में असंतुलन, तनाव, आतंकवाद, रोग और भ्रष्टाचार में वृद्धि की संभावना है।
धार्मिक दृष्टिकोण से, शनि को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है; अतः यह अवधि आध्यात्मिक चिंतन और कर्मों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का समय है।
शनि के इस गोचर का विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।
मेष राशि के लिए द्वादश भाव में वक्री शनि हतोत्साहजनक हो सकता है, जबकि मिथुन राशि के लिए यह शुभ फलदायी होगा।
वृषभ राशि के जातकों को आय में कमी और योजनाओं में विफलता का सामना करना पड़ सकता है।
कर्क राशि के लिए नवम स्थान में वक्री शनि नुकसानदायक नहीं होगा।
यह समय पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का अवसर है।
इस अवधि में देवता शनि की विधिपूर्वक पूजा करने से शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।
शनि ग्रह का गोचर धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण समय है।
इस गोचर के दौरान, सकारात्मक सोच और धैर्य रखना अत्यंत आवश्यक है।
यह समय हमें अपने कर्मों के प्रति जागरूक रहने और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करता है।
शनि के इस वक्री गोचर का प्रभाव जानने के लिए आप अपने ज्योतिषी से परामर्श ले सकते हैं।
- शनि 13 जुलाई को वक्री, 28 नवंबर को मार्गी होगा।
- मौसम में बदलाव, तनाव और रोग की संभावना।
- पूजा, ध्यान से शुभ फल की प्राप्ति।
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Posted on 13 July 2025 | Keep reading HeadlinesNow.com for news updates.
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