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नेता सत्ता के लिए निचले स्तर तक गिरा रहे हैं भाषा की गरिमा Breaking News Update

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नेता सत्ता के लिए निचले स्तर तक गिरा रहे हैं भाषा की गरिमा Breaking News Update

सत्ता पाने के लिए राजनीति में भाषा निम्न स्तर तक पहुंच गई है।

आश्चर्य यह है कि ऐसा करने वाले नेताओं में कोई शर्म-लिहाज नहीं बची है।

विकास, भ्रष्टाचार और देश की एकता-अखंडता जैसे मुद्दों पर वोट बैंक बटोरने के लक्ष्य की तुलना में नेताओं को स्तरहीन भाषा का प्रयोग करना सत्ता पाने के लिए ज्यादा आसान लगता है।

चुनाव समीप आते ही नेताओं की जुबान बेलगाम हो जाती है।

बिहार विधानसभा चुनाव समीप हैं।

ऐसे में प्रतिद्वन्दी राजनीति दल किसी भी सूरत में सत्ता पाने चाहते हैं, बेशक इसके लिए भाषा की मर्यादा को ही तार-तार क्यों न करना पड़े।

    बिहार के दरभंगा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी ने नेताओं के भाषा विवाद को नैतिकता के निचले पायदान पर पहुंचा दिया है।

अफसोसजनक यह है कि राजनीतिक दलों के मुखिया ऐसी हरकतें करने के लिए माफी तक नहीं मांगते।

इसके विपरीत दूसरे नेताओं ने कब-कब इस तरह की अमर्यादित और अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया, इसका बेशर्मी से उदहारण देने लगते हैं।

पीएम मोदी के मामले में भी यही तौर-तरीका अपनाया गया।

इसे भी पढ़ें: बिहार विधानसभा चुनाव: आखिर कितने उपमुख्यमंत्री बनाने का वादा करेंगे तेजस्वी ? मौका चुनाव का न हो तब भी नेता सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ऐसी हरकतें करते रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में यह गिरावट तेजी से आई है।

देश का शायद ही कोई नेता ऐसा हो, जिसने भाषा की गरिमा को छिन्न-भिन्न नहीं किया हो।

भाषा के अलावा नेता जुमलों का इस्तेमाल भी सत्ता स्वार्थ के लिए करते रहे हैं।

इसकी फेहरिस्त काफी लंबी है।

दिल्ली में निर्भया बलात्कार हत्याकांड के बाद आरोपियों को हुई फांसी की सजा पर समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने एक रैली में कहा था कि जब लड़के और लड़कियों में कोई विवाद होता है तो लड़की बयान देती है कि लड़के ने मेरा बलात्कार किया।

इसके बाद बेचारे लड़के को फांसी की सजा सुना दी जाती है।

बलात्कार के लिए फांसी की सजा अनुचित है।

लड़कों से गलती हो जाती है।

          कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक पार्टी कार्यक्रम में जयंती नटराजन को टंच माल कह दिया था।

दिग्गी ने एक बार राखी सावंत पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अरविंद केजरीवाल और राखी सावंत जितना एक्सपोज करने का वादा करते हैं उतना करते नहीं हैं।

उनके इस बयान पर राखी न उन्हें सठिया गए हैं, कह कर झिड़का था।

शरद यादव शरद यादव महिलाओं पर कई बार अभद्र टिप्पणी की।

जेडीयू नेता रहे शरद यादव ने बयान दिया था कि बेटियों की इज्जत से वोट की इज्जत बड़ी है, जिसके बाद सभी तरफ से इसका बयान का खंडन किया गया।

महिला आरक्षण विधेयक जब पहली बार संसद में रखा गया था तब शरद यादव ने कहा था कि इस विधेयक के जरिए क्या आप परकटी महिलाओं को सदन में लाना चाहते हैं।

    भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था महिलाओं को ऐसा श्रृंगार करना चाहिए, जिससे श्रद्धा पैदा हो, न कि उत्तेजना।

कभी कभी महिलाएं ऐसा श्रृंगार करती हैं, जिससे लोग उत्तेजित हो जाते हैं।

एक अन्य कार्यक्रम में भाजपा नेता विजयवर्गीय ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को महिलाओं का शौकीन बताया था।

छत्तीसगढ़ के कोरबा से भाजपा सांसद रहे बंसीलाल महतो ने छत्तीसगढ़ के खेल मंत्री भैयालाल राजवाड़े का नाम लेते हुए कहा था कि वो अक्सर बोला करते हैं कि अब बालाओं की जरूरत मुंबई और कलकत्ता से नहीं है, कोरबा की टूरी और छत्तीसगढ़ की लड़कियां टनाटन हो गई हैं।

हरियाणा की एक खाप पंचायत के नेता जितेंद्र छत्तर ने कहा था कि मेरे ख्याल से फास्ट फूड खाने से बलात्कार की घटनाएं बढ़ती हैं।

    इसी तरह भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने एक बार प्रियंका गांधी के लिए कहा था कि वह बनारस से चुनाव हार जाएंगी क्योंकि बहुत शराब पीती हैं।

नेहरू और लेडी माउंटबेटन के संबंधों पर भी स्वामी विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।

भाजपा नेता श्रीप्रकाश जायसवाल ने एक बार बयान दिया था कि, नई शादी का मजा ही कुछ और होता है और ये तो सब जानते हैं कि पुरानी बीवी में वो मजा नहीं रहता।

गोवा के मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने लड़कियों के शराब पीने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा था मैं डरने लगा हूं क्योंकि अब तो लड़कियां भी शराब पीने लगी हैं।

सहने की क्षमता खत्म हो रही हैं।

    वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में नेताओं की जुबान ने अपने बयानों से देश को शर्मसार कर दिया था।

इसको लेकर चुनाव आयोग ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, आजम खान और मायावती को 72 और 48 घंटों के लिए बैन किया था।

गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव से पहले कांगेस नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

हालांकि अपने बयान के बाद मणिशंकर अय्यर ने माफी मांग ली थी।

गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राहुल गांधी के मंदिरों में बैठने के तरीके और पूजा पर कमेंट किया।

बात यहां तक बढ़ी कि राहुल गांधी के गैर-हिंदू से लेकर जनेऊ संस्कार तक को निशाने पर ले लिया गया।

    मेरठ में एक कार्यक्रम के भाजपा नेता साक्षी महाराज ने कहा कि देश की आबादी हिंदुओं की वजह से नहीं बढ़ रही है, यह कुछ समुदाय के लोगों की वजह से बढ़ रही है, जो चार पत्नी रखते हैं और 40 बच्चे पैदा करते हैं।

भाजपा नेता दयाशंकर सिंह ने बसपा सुप्रीमो मायावती को पर ऐसा बयान दिया था जिसको लेकर उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा था।

मायावती पर पार्टी का टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए दयाशंकर सिंह ने कहा था कि बदतर चरित्र की आज मायावतीजी हो गईं हैं।

नेताओं की गंदी होती जुबान और उस पर पार्टी नेतृत्व की तरफ से अंकुश न लगाया जाना समाज के लिए बेहद घातक हो सकता है।

सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसे आपत्तिजनक बयान तेजी से वायरल होते हैं, जो लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं।

अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने वाले नेताओं को पार्टी से बर्खास्त कर देना चाहिए।

साथ ही यह नियम भी होना चाहिए कि एक पार्टी से निकाले जाने के बाद उसे दूसरे पार्टी की सदस्यता न मिल सके।

ऐसा होने से जो नेता अभी अमर्यादित भाषा बोल रहे हैं, उनकी बदजुबानी पूरी तरह बंद हो जाएगी।

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Posted on 09 September 2025 | Follow HeadlinesNow.com for the latest updates.

Topics:
राजनीति Politics News

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